रामायण : 2.राम और उनके भाईयों का जन्म
राम और उनके भाईयों का जन्म
भगवान राम और उनके भाईयों के जन्म की कथा दिव्य हस्तक्षेप, स्वर्गीय योजनाओं और जटिल अनुष्ठानों से भरी हुई है। आइए इस रोचक कथा को वाल्मीकि रामायण और रामकीर्ति के अनुसार समझें।
राजा दशरथ की चिंता
राजा दशरथ, जो अयोध्या के एक शक्तिशाली और धर्मपरायण शासक थे, संतान न होने के कारण अत्यंत चिंतित रहते थे। उनकी तीन रानियाँ - कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा थीं। लेकिन, उनमें से किसी से भी उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई थी।
काफी सोच-विचार के बाद, राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए अश्वमेध यज्ञ करने का निर्णय लिया। इस पर चर्चा करने के लिए उन्होंने सुयज्ञ, वामदेव, जाबालि, काश्यप, और कुलगुरु वशिष्ठ जैसे विद्वान मुनियों को आमंत्रित किया। सभी ने राजा के विचार की प्रशंसा की और उन्हें यज्ञ की तैयारी करने का सुझाव दिया।
ऋष्यश्रृंग की भूमिका
मुनियों के जाने के बाद, मंत्री सुमंत्र ने राजा दशरथ को ऋष्यश्रृंग को आमंत्रित करने का सुझाव दिया। राजा दशरथ स्वयं ऋष्यश्रृंग और उनकी पत्नी शांता को अंगदेश से अयोध्या लाए।
ऋष्यश्रृंग और अन्य मुनियों ने सरयू नदी के तट पर यज्ञ मंडप तैयार किया और पुत्रेष्टि यज्ञ आरंभ किया। यज्ञ के दौरान, देवता और ऋषिगण वहाँ एकत्र हुए। देवताओं ने ब्रह्माजी से रावण के अत्याचारों से मुक्ति का उपाय पूछा। ब्रह्माजी ने कहा कि रावण को मनुष्यों द्वारा ही मारा जा सकता है, क्योंकि उसने केवल देवताओं और अन्य दिव्य प्राणियों से न मारे जाने का वरदान माँगा था।
इसी समय भगवान विष्णु प्रकट हुए। देवताओं ने उनसे प्रार्थना की कि वे राजा दशरथ की रानियों के पुत्र रूप में अवतार लें और रावण का वध करें। भगवान विष्णु ने चार स्वरूपों में अवतरित होने का वचन दिया।
दिव्य खीर का प्रादुर्भाव
यज्ञ समाप्त होने पर यज्ञकुंड से एक दिव्य पुरुष प्रकट हुआ, जिसके हाथ में सोने की परात में दिव्य खीर थी। उसने राजा दशरथ से खीर को अपनी रानियों में बाँटने का आग्रह किया। राजा ने आधी खीर कौशल्या को, एक चौथाई सुमित्रा को, और शेष का आधा हिस्सा कैकेयी को दिया। बची हुई खीर सुमित्रा को दी गई।
राम और उनके भाईयों का जन्म
छह ऋतुओं के बाद चैत्र शुक्ल नवमी के दिन, पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया। उनके बाद कैकेयी ने भरत को और सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। ये चारों भाई विष्णु के दिव्य स्वरूप थे, जिन्हें धर्म की स्थापना और रावण के विनाश के लिए भेजा गया था।
रामकीर्ति का संस्करण
रामकीर्ति, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में लोकप्रिय है, इस कथा को थोड़ा भिन्न रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें दशरथ की रानियों के नाम कौसुरिया, समुद्रजा और कैयाकेशी बताए गए हैं। ऋष्यश्रृंग को कोलायकोटि कहा गया है, और उनका जन्म एक हिरण से हुआ बताया गया है।
इस संस्करण में विष्णु राम के रूप में, जबकि भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न क्रमशः विष्णु के चक्र, नाग और गदा के अवतार माने गए हैं।
मुख्य बिंदु
वाल्मीकि रामायण और रामकीर्ति दोनों में कथा का सार एक ही है, लेकिन सांस्कृतिक और भौगोलिक प्रभावों के कारण कई अंतर हैं।
दोनों में दशरथ द्वारा यज्ञ और विष्णु के अवतार की कथा है।
रामकीर्ति में भाइयों के रंगों और उनकी दिव्यता का विशेष उल्लेख मिलता है।




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