राम वनवास: एक अद्भुत और शिक्षाप्रद कथा वाल्मीकि रामायण और रामकीर्ति की कथा में राम के वनवास का उल्लेख दो अलग-अलग दृष्टिकोण से किया गया है, लेकिन दोनों में समानता भी है। यह कथा न केवल अद्भुत है, बल्कि इसमें छिपे कई महत्वपूर्ण संदेश भी हैं। आइए, इस कहानी को विस्तार से समझें। राजा दशरथ की योजना और राम का राज्याभिषेक वाल्मीकि रामायण के अनुसार, राजा दशरथ ने महसूस किया कि उनके ज्येष्ठ पुत्र राम अब बल-पराक्रम में यम और इंद्र के समान, बुद्धि में बृहस्पति के समान और धैर्य में पर्वत के समान हो चुके हैं। साथ ही, राम अपने गुणों और धर्मपरायणता से प्रजा के अत्यंत प्रिय हो गए थे। राजा दशरथ ने अपने मंत्रियों और सभासदों से परामर्श कर राम को युवराज बनाने का निर्णय लिया। उनकी यह घोषणा सुनते ही अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ गई। नगर को सजाया जाने लगा, उत्सव की तैयारियाँ शुरू हो गईं। लेकिन इस आनंद के बीच कैकेयी की दासी मंथरा ने एक षड्यंत्र रचने की योजना बना ली। मंथरा का षड्यंत्र मंथरा, जो कैकेयी की प्रिय दासी थी, उसने जब अयोध्या में हो रही तैयारियों को देखा, तो उसे यह स्वीकार नहीं हुआ। उसने कैकेयी के पास जाक...