रामायण : 16.सीता का अपहरण ( भाग - 2)

सीता का अपहरण (दूसरा भाग)

रावण द्वारा सीता का अपहरण रामायण के प्रमुख और नाटकीय प्रसंगों में से एक है। इस कथा का अगला भाग उन घटनाओं पर आधारित है जो रावण द्वारा सीता के अपहरण के बाद घटित हुईं।

सीता की करुण पुकार और जटायु का बलिदान

जब रावण ने सीता का अपहरण किया, उस समय सीता ने राम और लक्ष्मण को पुकारना शुरू किया। उनकी करुण पुकारों ने आकाश को गूंजा दिया। लेकिन दुर्भाग्यवश, कोई उनकी सहायता के लिए उपस्थित नहीं था। रावण ने उन्हें जबरन अपने पुष्पक विमान में बिठा लिया और लंका की ओर चल पड़ा।

इस बीच, पक्षियों के राजा जटायु ने सीता की पुकार सुनी। जटायु एक वृद्ध और सम्मानित गिद्ध थे, जो राम के पिता दशरथ के मित्र भी थे। जब उन्होंने रावण को सीता का अपहरण करते देखा, तो उन्होंने रावण को चेतावनी दी और सीता को मुक्त करने के लिए कहा। लेकिन रावण अपने अहंकार और शक्ति के मद में चूर था। उसने जटायु की बातों को अनसुना कर दिया।

जटायु ने रावण से सीता को छुड़ाने के लिए वीरतापूर्वक युद्ध किया। रावण ने अपने धनुष और बाणों से जटायु पर प्रहार किया, लेकिन जटायु ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी चोंच और पंखों से रावण पर प्रहार किया और पुष्पक विमान को रोकने का प्रयास किया।

यद्यपि जटायु ने रावण को क्षति पहुंचाई, लेकिन वृद्धावस्था और थकावट के कारण वह अधिक समय तक युद्ध नहीं कर सके। रावण ने अपने तलवार से जटायु के पंख काट दिए। घायल अवस्था में जटायु पृथ्वी पर गिर पड़े।

सीता का संघर्ष और अशोक वाटिका

रावण ने सीता को लंका में अपने महल के उद्यान, अशोक वाटिका में रखा। अशोक वाटिका एक सुंदर और मनोहारी स्थान था, लेकिन सीता के लिए यह एक कारागार से कम नहीं था। रावण ने उन्हें अपने साथ विवाह करने का प्रस्ताव दिया और लंका की रानी बनने का प्रलोभन दिया। उसने सीता को अनेक प्रकार के आभूषण और वैभव का वादा किया।

सीता, जो अपने पति राम के प्रति निष्ठावान थीं, उन्होंने रावण के प्रस्तावों को ठुकरा दिया। उन्होंने रावण को कठोर शब्दों में उत्तर दिया और कहा कि उनके पति राम अकेले ही उसे पराजित कर सकते हैं। सीता के इस उत्तर से रावण क्रोधित हो गया, लेकिन उसने उन्हें हानि नहीं पहुंचाई। उसने अपनी राक्षसियों को सीता की निगरानी करने और उन्हें प्रताड़ित करने का आदेश दिया।

राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रिया

इस बीच, राम ने मारीच का वध करने के बाद मारीच की करुण पुकार सुनी, जो राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकार रहा था। राम को तुरंत ही समझ आ गया कि यह मारीच की माया थी। वे अत्यंत चिंतित होकर शीघ्रता से पंचवटी की ओर लौटे।

पंचवटी पहुंचने पर उन्होंने देखा कि सीता वहां नहीं थीं। उन्होंने लक्ष्मण को बुलाया और स्थिति स्पष्ट करने को कहा। लक्ष्मण ने बताया कि सीता ने उन्हें राम की सहायता के लिए जाने के लिए बाध्य किया था। राम और लक्ष्मण ने आसपास के क्षेत्र में सीता को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।

जटायु से भेंट

सीता को ढूंढते-ढूंढते राम और लक्ष्मण जटायु के पास पहुंचे। जटायु, जो घायल अवस्था में पड़े थे, उन्होंने उन्हें पूरी घटना सुनाई। उन्होंने बताया कि रावण ने सीता का अपहरण कर लिया है और उन्हें लंका ले गया है। जटायु ने राम से क्षमा मांगी कि वह रावण को रोकने में असमर्थ रहे। जटायु ने राम को सीता को बचाने का वचन दिया और अपने प्राण त्याग दिए। राम ने जटायु के बलिदान को सम्मानित किया और उनका अंतिम संस्कार विधिपूर्वक किया।

शबरी का आतिथ्य

जटायु की मृत्यु के बाद राम और लक्ष्मण सीता की खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। रास्ते में उनकी भेंट शबरी नामक एक वृद्ध महिला से हुई। शबरी राम के आगमन की प्रतीक्षा में वर्षों से तपस्या कर रही थीं। उन्होंने राम और लक्ष्मण का स्वागत किया और अपने आश्रम में उन्हें फल प्रदान किए।

शबरी ने राम को सीता की खोज में सहायता के लिए सुग्रीव से मिलने का सुझाव दिया। सुग्रीव वानरराज बाली के छोटे भाई थे, जो ऋष्यमूक पर्वत पर निवास करते थे। शबरी के निर्देशानुसार राम और लक्ष्मण ऋष्यमूक पर्वत की ओर बढ़ गए।

सुग्रीव और वानर सेना की सहायता

ऋष्यमूक पर्वत पर राम और लक्ष्मण की भेंट सुग्रीव और उनके मंत्री हनुमान से हुई। सुग्रीव ने राम को सीता की खोज में सहायता करने का वचन दिया। बदले में राम ने सुग्रीव को बाली से मुक्त करने और किष्किंधा का राजा बनाने का वादा किया।

राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया। सुग्रीव ने अपनी वानर सेना को चारों दिशाओं में सीता की खोज में भेजा। दक्षिण दिशा की खोज का नेतृत्व हनुमान ने किया।

हनुमान की लंका यात्रा

हनुमान, जो पवनपुत्र और असीम शक्ति के धनी थे, लंका की ओर बढ़े। समुद्र को पार करने के लिए उन्होंने अपनी शक्ति का उपयोग किया और एक ही छलांग में लंका पहुंच गए। लंका में प्रवेश करने के बाद उन्होंने सीता को ढूंढने के लिए रावण के महल और अशोक वाटिका की ओर रुख किया।

अशोक वाटिका में उन्होंने सीता को विलाप करते हुए पाया। सीता अपने पति राम के नाम का स्मरण कर रही थीं। हनुमान ने राम की अंगूठी सीता को दी और उन्हें राम का संदेश सुनाया।

हनुमान ने रावण की सेना से युद्ध कर लंका में राम का संदेश फैलाया। उन्होंने लंका के प्रमुख भवनों में आग लगाई और रावण को राम के पराक्रम की चेतावनी दी।

निष्कर्ष

सीता का अपहरण और उसके बाद की घटनाएं रामायण के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली प्रसंगों में से एक हैं। यह कथा हमें धर्म, निष्ठा, और साहस के महत्व को सिखाती है। सीता, राम, और लक्ष्मण के चरित्र हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पर अडिग रहने की प्रेरणा देते हैं।



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