रामायण : 3.लंका और रावण की कहानी: स्वर्णिम नगरी का इतिहास
लंका और रावण की कहानी: स्वर्णिम नगरी का इतिहास
लंका और रावण की कहानी भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं का एक अविस्मरणीय हिस्सा है। यह कहानी केवल राक्षसों और देवताओं की लड़ाई का वर्णन नहीं करती, बल्कि सत्ता, त्याग, और विजय के कई पहलुओं को दर्शाती है। आइए, वाल्मीकि रामायण और रामकीर्ति में वर्णित इस कहानी को रोचक तरीके से समझें।
लंका और कुबेर का स्वर्णिम युग
रावण का उदय और लंका पर अधिकार
वाल्मीकि रामायण में रावण के जन्म और तपस्या का भी विस्तृत वर्णन है। देवताओं से वरदान प्राप्त करने के बाद, रावण ने कुबेर से लंका वापस मांग ली। कुबेर ने अपने पिता की सलाह पर इसे सौंप दिया और कैलाश पर्वत की ओर चले गए। इस प्रकार लंका रावण के अधीन आ गई।
रामकीर्ति में लंका की उत्पत्ति
रामकीर्ति के अनुसार, लंका का इतिहास थोड़ा अलग है। दक्षिण दिशा में स्थित लंका द्वीप पहले 'रंगका' के नाम से जाना जाता था, जो कौओं के घोंसले के कारण प्रसिद्ध था। यह द्वीप सहमालिवान नामक राजा के लिए सृजित किया गया था, लेकिन नारायण के भय से सहमालिवान पाताल लोक भाग गया।
ब्रह्मा ने विश्वकर्मा को नीलकल पर्वत पर एक भव्य नगरी बनाने का आदेश दिया और इसे 'विजय लंका' नाम दिया। सहमालिवान के बाद, यह नगरी चतुरवक्त्र और फिर लैस्टियन जैसे राजाओं के अधीन रही। लैस्टियन ने अपनी मृत्यु से पहले अपने राज्य को दस पुत्रों में विभाजित कर दिया। रावण, जिसे दसकंठ भी कहा जाता है, लंका का राजा बना।
लंका का विभाजन और रावण का राज्याभिषेक
लंका के अंतिम राजा लैस्टियन ने अपने दस पुत्रों में राज्य का विभाजन किया। रावण लंका का शासक बना, जबकि उसके भाइयों को अन्य राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई। उदाहरण के लिए, कुबेर को कालचक का शासक बनाया गया और पुष्पक विमान सौंपा गया। अन्य भाइयों को विभिन्न क्षेत्रों का शासक बनाया गया।
रामकीर्ति में वर्णित है कि लैस्टियन ने अपने राज्य को इस प्रकार विभाजित किया ताकि उसके पुत्रों के बीच संघर्ष न हो। लेकिन रावण ने अपनी शक्ति और प्रभुत्व से लंका को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया।
दोनों संस्करणों में अंतर
वाल्मीकि रामायण में लंका का निर्माण पहले से ही राक्षसों के लिए हुआ था और यह कुबेर के अधीन थी।
रामकीर्ति में लंका का निर्माण ब्रह्मा के आदेश से हुआ और यह सहमालिवान, चतुरवक्त्र और लैस्टियन जैसे राजाओं के अधीन रही।
वाल्मीकि रामायण में कुबेर लंका को स्वेच्छा से छोड़कर कैलाश चले गए, जबकि रामकीर्ति में रावण को लंका विरासत में मिली।




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